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संघ लोक सेवा आयोग, UPSC के मुख्य कार्य

27 Nov 2025 • Admin

UPSC के मुख्य कार्य:

UPSC का प्राथमिक कार्य देश के प्रशासनिक ढांचे के लिए योग्य अधिकारियों की भर्ती करना है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  • भर्ती (Recruitment): यह विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) और केंद्रीय सेवाओं (Central Services) के लिए भर्ती परीक्षाएँ आयोजित करता है।

  • पदोन्नति (Promotion): यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotions) के मामलों में सलाह देता है।

  • नियम बनाना (Framing Rules): यह सिविल सेवाओं और पदों से संबंधित सेवा नियमों (Service Rules) को बनाने या संशोधित करने पर सरकार को परामर्श देता है।

UPSC द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाएँ:

परीक्षा का नाम संक्षिप्त रूप सेवाएँ जिनमें चयन होता है सिविल सेवा परीक्षा CSE IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा), IPS (भारतीय पुलिस सेवा), IFS (भारतीय विदेश सेवा), और 20+ अन्य केंद्रीय सेवाएँ। इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा ESE (IES) ग्रुप 'A' और 'B' तकनीकी पद। संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा CDS भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा NDA & NA 12वीं के बाद रक्षा सेवाओं में अधिकारी। संयुक्त भू-वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक परीक्षा Geo-Scientist Exam भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में पद।

सिविल सेवा परीक्षा (CSE):

UPSC की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination - CSE) है, जिसके माध्यम से देश को शीर्ष अधिकारी मिलते हैं। यह परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है:

  1. प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam): दो वस्तुनिष्ठ प्रकार (Objective Type) के पेपर होते हैं – GS-I (मेरिट के लिए) और CSAT (क्वालीफाइंग)।

  2. मुख्य परीक्षा (Main Exam): नौ लिखित (Descriptive) पेपर होते हैं, जिनमें से सात पेपर मेरिट के लिए गिने जाते हैं।

  3. साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण (Interview/Personality Test): मुख्य परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों का अंतिम मूल्यांकन।

CSE के लिए पात्रता (Eligibility for CSE)

  • शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री।

  • आयु सीमा: आमतौर पर 21 वर्ष से 32 वर्ष (आरक्षित वर्गों के लिए ऊपरी आयु सीमा में छूट)।

  • प्रयासों की संख्या: सामान्य वर्ग के लिए 6 प्रयास निर्धारित हैं, जबकि आरक्षित वर्गों के लिए यह संख्या भिन्न होती है।

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